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हिन्दू पंचांग

आज का पंचांग — 13 अप्रैल 2026

सोमवार | तिथि: चतुर्दशी | नक्षत्र: धनिष्ठा

आज का विस्तृत पंचांग

🌙

तिथि

चतुर्दशी

तिथि चंद्रमा की स्थिति पर आधारित है और हिन्दू पंचांग का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।

नक्षत्र

धनिष्ठा

नक्षत्र चंद्रमा की राशि में स्थिति को दर्शाता है। प्रत्येक नक्षत्र का अपना विशेष प्रभाव होता है।

🕉️

योग

शुभ

योग सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त गति से बनता है। यह दिन की शुभता निर्धारित करता है।

☀️

करण

गर

करण तिथि का आधा भाग है। प्रत्येक तिथि में दो करण होते हैं।

🌅 सूर्योदय

06:15 AM

🌇 सूर्यास्त

06:42 PM

⚠️ राहुकाल

07:30 AM — 09:00 AM

अभिजित मुहूर्त

11:54 AM — 12:42 PM

आज के शुभ मुहूर्त

  • 06:15 AM — 07:45 AM (ब्रह्म मुहूर्त उपरांत)

  • 11:54 AM — 12:42 PM (अभिजित मुहूर्त)

  • 02:30 PM — 04:00 PM (विजय मुहूर्त)

राहुकाल (07:30 AM — 09:00 AM): इस समय कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ न करें। यात्रा, व्यापार और महत्वपूर्ण अनुबंध इस समय में वर्जित हैं।

चौघड़िया

चौघड़िया दिन और रात के शुभ-अशुभ समय को दर्शाता है। शुभ, लाभ, अमृत और चल चौघड़िया शुभ कार्यों के लिए उत्तम हैं।

उद्वेग

अशुभ

सूर्य का काल — यात्रा वर्जित

चल

शुभ

चंद्रमा का काल — यात्रा के लिए उत्तम

लाभ

शुभ

बुध का काल — व्यापार और धन लाभ

अमृत

अति शुभ

चंद्रमा का काल — सर्वोत्तम समय

काल

अशुभ

शनि का काल — कार्य आरंभ न करें

शुभ

शुभ

बृहस्पति का काल — शुभ कार्यों हेतु

रोग

अशुभ

मंगल का काल — स्वास्थ्य का ध्यान रखें

अगले 7 दिनों का पंचांग

दिनांकवारतिथिनक्षत्रयोगराहुकाल
13 अप्रैल 2026सोमवारचतुर्दशीधनिष्ठाशुभ07:30 AM — 09:00 AM
14 अप्रैल 2026मंगलवारपूर्णिमाशतभिषाशुक्ल03:00 PM — 04:30 PM
15 अप्रैल 2026बुधवारप्रतिपदापूर्व भाद्रपदब्रह्म12:00 PM — 01:30 PM
16 अप्रैल 2026गुरुवारद्वितीयाउत्तर भाद्रपदइन्द्र01:30 PM — 03:00 PM
17 अप्रैल 2026शुक्रवारतृतीयारेवतीवैधृति10:30 AM — 12:00 PM
18 अप्रैल 2026शनिवारचतुर्थीअश्विनीविष्कुम्भ09:00 AM — 10:30 AM
19 अप्रैल 2026रविवारपंचमीभरणीप्रीति04:30 PM — 06:00 PM

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है और इसका क्या महत्व है?+

पंचांग हिन्दू कैलेंडर प्रणाली है जो पांच अंगों — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — पर आधारित है। "पंच" का अर्थ है पांच और "अंग" का अर्थ है भाग। पंचांग का उपयोग शुभ मुहूर्त निकालने, व्रत-त्योहार की तिथि जानने और दैनिक शुभ-अशुभ समय जानने के लिए किया जाता है। यह वैदिक ज्योतिष का अभिन्न अंग है और हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति में इसका उपयोग हो रहा है।

राहुकाल क्या है और इससे कैसे बचें?+

राहुकाल प्रत्येक दिन का वह समय है जो राहु ग्रह के प्रभाव में होता है। इस समय कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करना अशुभ माना जाता है। राहुकाल प्रत्येक दिन अलग-अलग समय पर होता है — सोमवार को सुबह 7:30-9:00, शनिवार को 9:00-10:30, शुक्रवार को 10:30-12:00 बजे। राहुकाल में यात्रा, नया व्यापार, महत्वपूर्ण अनुबंध और शुभ कार्य टालने चाहिए।

शुभ मुहूर्त कैसे निकाला जाता है?+

शुभ मुहूर्त निकालने के लिए पंचांग के सभी पांच अंगों — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — का विश्लेषण किया जाता है। इसके अतिरिक्त राहुकाल, यमगण्ड और गुलिक काल जैसे अशुभ समय को छोड़ा जाता है। अभिजित मुहूर्त (दोपहर 11:54-12:42 लगभग) प्रतिदिन का सबसे शुभ समय माना जाता है जो लगभग सभी कार्यों के लिए उपयुक्त है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े कार्यों के लिए ज्योतिषी से विस्तृत मुहूर्त निकलवाना श्रेयस्कर है।

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